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रविवार, 31 दिसंबर 2017

जनकृति पत्रिका का नवीन अंक प्रकाशित।



नव वर्ष की शुभकामनाओं के साथ जनकृति का नवीन अंक आप सभी के समक्ष अब प्रस्तुत है। यह अंक पत्रिका की वेबसाईट पर प्रकाशित किया गया है- http://www.jankritipatrika.in/... इस अंक के साथ ही पत्रिका के 32 अंक प्रकाशित हो गए है। इस अंक में विविध क्षेत्रों के विविध विषयों को समेटा गया है। यह अंक जनकृति के नए कलेवर के साथ प्रस्तुत किया गया है।

जनकृति को यहाँ तक पहुंचाने के लिए आप सभी का आपार स्नेह एवं सहयोग मिला हमें आशा है यह आगे भी हमें मिलता रहेगा। 
पुनः एक बार फिर आप सभी मित्रों को जनकृति परिवार की ओर से नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ।

[आगामी अंक हेतु रचनाएँ, लेख इत्यादि 10 जनवरी से पूर्व jankritipatrika@gmail.com पर मेल करें]

इस अंक में- 

 साहित्यिक विमर्श/ Literature Discourse
कविता
प्रियंका पाण्डेय, मीनाक्षी गांधी, मधुमिता, सारिका भूषण, डॉ. प्रतिभा सिंह, सुशांत सुप्रिय, ब्यूटी अंकिता, कुमार रवि   

ग़ज़ल
नवीन मणि त्रिपाठी

कहानी
·       डिस्ट्रक्टिव माइंड: सत्य प्रकाश भारतीय

लघुकथा
·       डॉ. संगीता गांधी
·       डॉ. उमा मेहता
·       वीना करमचन्दाणी



पुस्तक  समीक्षा
·       विजय या वीरगति एक दृष्टि में [लेखक- लेफ्टिनेंट कर्नल रोहित अग्रवाल (सेवानिवृत्त) ]: समीक्षक- डॉ. राहुल उठवाल
·       'अट्टहास' पत्रिका का  नया प्रयोग: समीक्षक- आरिफा एविस

व्यंग्य
·       सम्मान समारोह में वीतरागी: सुदर्शन वशिष्ठ
·       गुरुगिरी मिटती नहीं हमारी: अमित शर्मा
·       कानून का सम्मान: दिनेश प्रताप सिंह चौहान

लोकसाहित्य
·       बुंदेलखण्डी-लोक साहित्य: अनुरुद्ध सिंह
·       लोक साहित्य में प्रकृति वर्णन की शिष्ट साहित्य से तुलना: पूनम देवी


पर्यटन
·       मणिपुर के पर्यटन स्थल: वीरेन्द्र परमार

साहित्यिक लेख
·       हिंदी उपन्यासों में नायक-नायिका के बदलते स्वरूप: पूजा हेमकुमार अलापुरिया
·       इक्कीसवीं सदी का मध्यवर्ग: डॉ. अरविंद कुमार उपाध्याय
·       ठाकुर के काव्य में लोक: रेखा कुमारी
·       नेलकटर :बचपन की मासूम स्मृतियों पर आधारित कहानी- मधुमिता
·       हिंदी उपन्यासों में देह व्यापार: डॉ. रंजीत परब

मीडिया- विमर्श/ Media Discourse
·       हिंदी पत्रकारिता और भाषा- सुरेखा शर्मा [लेख]
·       प्रेमचंद और हंस पत्रिका: शविशु विशु [लेख]



कला- विमर्श/ Art Discourse
·       नाट्य साहित्य के बदलते प्रतिमान: शिखा श्रीवास्तव  [शोध आलेख]
·       हिंदी सिनेमा में हाशिये के लोग- शबनम मौसी के संदर्भ: वैष्णव पी वी [शोध आलेख]
·       सिनेमा, साहित्य और सामाजिक सरोकार: सुनील कुमार सुधांशु [लेख]
·       मुग़ल-ए-आज़म: सच्चे प्रेम की इबादत- मनीष निरंजन [शोध आलेख]
·       लोक कला और सौंदर्यशास्त्र: अमरेन्द्र प्रताप सिंह [शोध आलेख]
·       कंठानुकंठ परंपरित होती कुमांऊनी लोक गाथाएं: डॉ. वसुंधरा उपाध्याय

दलित एवं आदिवासी- विमर्श/ Dalit and Tribal Discourse
·       दलित आत्मकथाएँ और समकालीन परिदृश्य: रंजीत कुमार यादव [शोध आलेख]
·       डॉ. अम्बेडकर: स्वप्न और यथार्थ- डॉ. नवाब सिंह [शोध आलेख]
·       सुशीला टाकभौरे की आत्मकथा ‘शिकंजे का दर्द’ में दलित नारी का जीवन यथार्थ- निर्मल सिंह [शोध आलेख]
·       ‘यथास्थिति से टकराते हुए’ में दलित स्त्री का जीवन संघर्ष- रितु अहलावत [शोध आलेख]
·       भारतेन्दुयुगीन साहित्य में जातीय चेतना- डॉ. बीरेन्द्र सिंह [शोध आलेख]
·       दलित प्रश्नों के आईने में संत रैदास की प्रासंगिकता- एजाजुल हक [शोध आलेख]
·       आदिवासी हिन्दी कविता में चित्रित सामाजिक संघर्ष: डॉ.दोड्डा शेषु बाबु [शोध आलेख]
·       आदिवासी केन्द्रित हिंदी उपन्यासों में स्त्री-संघर्ष: डॉ.अंकिता [शोध आलेख]
·       आदिवासी कविताओं में झाँकता आदिवासी विद्रोह व जीवन-संघर्ष: सलीम अहमद [शोध आलेख]
·       बस्तर जिला के जनजातीय समाज एवं उनका धार्मिक विकास: डॉ. रूपेंद्र कवि [शोध आलेख]
·       आदिवासियों के विलुप्त इतिहास का दस्तावेज़ ‘जंगल जंगल जलियांवाला’: रविन्द्र कुमार मीना [शोध आलेख]

स्त्री- विमर्श/ Feminist Discourse
·       Discourses on Identity in Hindi Literature with Special reference to Women’s Identity: Ajay Kumar Yadav & Hari Pratap Tripathi [Research Article]
·       हिंदी कथा लेखिकाओं के कथा-साहित्य में नारी-विमर्श: सर्वेश्वर प्रताप सिंह [शोध आलेख]
·       स्त्री शिक्षा की अग्रदूत: सावित्री बाई फुले- दीपा [शोध आलेख]
·       शरद शिंह के उपन्यास ‘कस्बाई सिमोन’ में चित्रित नारी-विमर्श के विविध आयाम: सपना
·       नई कहानी में स्त्री-स्वर और मन्नू भण्डारी की कहानियाँ: ज्ञानेन्द्र प्रताप सिंह
·       मराठी काव्‍यधारा और स्त्री प्रतिरोध: कदम गजानन साहेबराव
·       स्त्री विमर्श के संदर्भ में हिंदी लेखिकाओं का चिंतनपरक लेख: शिवानी कन्नौजिया
·       भूमंडलीकरण और आधी आबादी: उर्मिला कुमारी [शोध आलेख]
·       महादेवी वर्मा की रचनाओं में स्त्री विमर्श: सुन्दरम शर्मा [शोध आलेख]
·       मित्रों मरजानी : स्त्री के विविध रूप- शिल्पा शर्मा [शोध आलेख]
·       'मुझे चाँद चाहिए' नारी जीवन की संघर्ष गाथा: डॉ. प्रमोद पांडेय [शोध आलेख]
·       एक कड़वा सच: जयति जैन (नूतन)

बाल- विमर्श/ Child Discourse
·       अध्यापक, अभिभावक और बच्चे: गोपेश आर शुक्ला [लेख]

भाषिक- विमर्श/ Language Discourse
·       NATURAL LANGUAGE PLANNING VS SIGN LANGUAGE PLANNING: A SPECIALIZED APPROACH: Dr. Pallav Vishnu & Dr. G. D. Wanode

·       वैज्ञानिक शब्दावली का वर्तमान समय में महत्व: दिनेश कुमार
·       भाषा और राजनीति: सुमित कुमार चौधरी [शोध आलेख]
·       भारतीय भाषाओं का साहित्यिक अंतःसंबंध और वैशिष्ट्य: डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंघवी [शोध आलेख]
·       भारतीय भाषा के प्रति रघुवीर सहाय की चिन्ता: दिनेश कुमार यादव [शोध आलेख]
·       राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी का योगदान: मो. आसिफ अली [लेख]
·       अंग्रेजी के मोहपाश से आखिर कब मुक्त होंगे: अनामिका [लेख]

शिक्षा- विमर्श/ Education Discourse
·       असफल होते सरकारी विद्यालयों की कहानी-एक जुबानी: डॉ. अमितेश कुमार शर्मा [लेख]

समसामयिक विषय/ Current Affairs
·       कृषक समुदाय में आत्महत्याओं का सिलसिला – एक चिन्तनशील विमर्श: वागीशा शर्मा [लेख]
·       विमुद्रीकरण समाज का आम आदमी पर प्रभाव: निशा सतीश चंद्र मिश्रा [लेख]
·       जीएसटी का मकड़जाल: डॉ. मोनिका ओझा [लेख]
·       बेटियों को सामाजिक एवं कानूनी संरक्षण की  आवश्यकता (म.प्र. के विशेष संदर्भ में): डॉ. उषा सिंह [लेख]
·       किन्नर विमर्श: एक नई दृष्टि और एक नई पहल- डॉ. संध्या चौरसिया [लेख] 
·       सोशल मीडिया में बदजुबान होती अभिव्यक्ति की आजादी: एम. अफसर. खां. सागर [लेख]
·       वर्तमान भारतीय राजनीतिक प्रबंधन का आधार: कौटिलीयम अर्थशास्त्रम (एक समीक्षा)- ईश्वर सिंह शेखावत [शोध आलेख]
·       जल है तो कल है: मनोज राठी [लेख]
·       आपदा प्रबंधन की आपदा: ललित यादव [लेख]

शोध आलेख/ Research Article
·       स्वाधीनता पूर्व किसान कविताओं में जनचेतना: गिरहे दिलीप लक्ष्मण
·       बौद्ध धर्म में पर्यावरण और उसके संरक्षण की वर्तमान प्रासंगिकता: एक अध्ययन- दिनेश कुमार
·       भीष्म साहनी का कथा साहित्य और विभाजन की त्रासद कथा- हुसैनी बोहरा, मीनाक्षी सुथार
·       बदलते जीवन मूल्यों के परिप्रेक्ष्य में ‘गिलिगडु’ : वृद्धावस्था के विशेष सन्दर्भ में- निक्की कुमारी
·       ‘बस्ती’ में हम, हमारे भीतर बस्ती, कितना बसती हैं (इंतजार हुसैन के ‘बस्ती’ उपन्यास के संदर्भ में): पूजा मदान
·       सबसे बड़ा विकल्प खुला है आत्महत्या का !(राजेश जोशी की ‘विकल्प’ कविता के सन्दर्भ में): बर्नाली नाथ
·       नंदकिशोर आचार्य का गद्य: साहित्यालोचन एवं शिक्षा संबंधी चिंतन- मुकेश कुमार शर्मा
·       रघुवीर सहाय की कविता में व्यक्त समाज और प्रकृति: आशुतोष तिवारी
·       भारतीय संस्‍कृति पर वैश्‍वीकरण का प्रभाव संदर्भ- सोमा बंद्योपाध्‍याय रचित ‘सदी का शोक गीत’: डॉ. मीनाक्षी जयप्रकाश सिंह
·       साहित्य सम्बन्धी प्रेमचंद की चिंतन-दृष्टि: आशुतोष तिवारी
·       दुष्यंत कुमार की ग़ज़लों में संवेदना के विविध आयाम: डॉ. सोमाभाई पटेल
·       बदलते सांस्कृतिक मूल्य एवं कमलेश्वर के उपन्यास: डॉ. गजेन्द्र सिंह
·       वैश्विक परिप्रेक्ष्य में हिंदी भाषा और साहित्य: संदर्भ उदय प्रकाश रचित ‘पीली छतरी वाली लड़की’- डॉ. अजीत कुमार दास
·       देश  विभाजन केन्द्रित हिंदी-उर्दू कहानियों में स्त्री (‘सिक्का बदल गया’ और ‘खोल दो’ के सन्दर्भ में): नाजिया फातमा
·       विद्रोही : वाचिक परंपरा का अंतिम ‘जनकवि’: डॉ. कर्मानंद आर्य
·       उमेश चौहान: जन और सत्ता के बीच खड़ा कवि- डॉ. चैनसिंह मीना
·       कविता में राजनीती: विचारधारा और वर्चस्व के विरुद्ध आत्म-संघर्ष- अनूप कुमार बाली
·       वज्रयान और सिद्ध साहित्य: मुकेश कुमार वैष्णव
·       दक्खिनी हिंदी  साहित्य के विकास में हिन्दू पंथ एवं संतो का योगदान: प्रो. डॉ. सुनील गुलाबसिंग जाधव
·       धर्म-परिवर्तन (महात्मा गाँधी और अंबेडकर के विशेष संदर्भ में): सतीश कुमार तिवारी
·       फूलचंद गुप्ता और उनकी लंबी कविताओं के सामाजिक संदर्भ: डॉ. अमृत प्रजापति
·       भइया अपने गाँव में (बुंदेली काव्य) का लोक सांस्कृतिक अवलोकन: प्रदीप कुमार
·       रामाज्ञा शशिधर कृत ‘बुरे समय में नींद’: समयगत सच्चाईयों का ज्वलंत दस्तावेज- प्रेम कुमार
·       आजादी के आंदोलनों की अदृश्य स्त्रियां: रमन कुमार
·       सर्वेश्वरदयाल सक्सेना के काव्य में प्रतिरोध की संस्कृति-  दिनेश कुमार  यादव
·       कबीर का लोक और लोक के कबीर- ज़ुहेब उद्दीन
·       आचार्य रामचन्द्र शुक्ल की जनतांत्रिक चेतना: डॉ. श्रीहरि त्रिपाठी
·       सामाजिक एकीकरण का भाव और निर्गुण संत काव्य: कु. किरण त्रिपाठी
·       गीतांजलि श्री कृत ‘हमारा शहर उस बरस’ उपन्यास में व्यक्त सांप्रदायिक तनाव: कंचन बंसवाल
·       रेणु की कहानियों में लोकरंग और यथार्थ: रसप्रिया और ललपान की बेगम के संबंध में
·       लोकतंत्र की पृष्ठभूमि पर श्री लाल शुक्ल के साहित्य का अनुशीलन: लक्ष्मी गुप्ता
·       भक्ति आंदोलन और रामविलाश शर्मा की आलोचना दृष्टि: डॉ. प्रकाशचंद भट्ट
·       रेणु की कहानियों में ग्रामांचल मानवीय संवेदना की महक: डॉ. धनंजय कुमार साव
·       कस्तूरबा गांधी : ‘बा’ बनने की एक अंतर्कथा (द. अफ्रीका प्रवास के विशेष संदर्भ में)- राजू कुमार
·       समाज के दो सजग प्रहरी : बसवेश्वर और कबीर- डॉ० धर्मेन्द्र प्रताप सिंह
·       अमरकांत और दोपहर का भोजन: डॉ. आशुतोष कुमार झा
·       गीतिकाव्य और विद्यापति: डॉ. उमेश चंद्र शुक्ल
·       साहित्य में नवलेखन: दिव्या जोशी
·       अज्ञेय के बिम्ब: मनमीत कौर
·       उत्तरमध्यकालीन प्रमुख निर्गुण सन्त सम्प्रदाय: सामान्य परिचय- डॉ॰ अनुराधा शर्मा
·       सुराज की लड़ाई: सुराज- मनीष कुमार गुप्ता
·       तुलसीदास कृत ‘गीतावली‘ में अप्रस्तुत विधान (अलंकारों के संदर्भ में)- अशोक पंकज
·       पत्रों में झांकता बच्चन का व्यक्तित्व: रविता कुमारी
·       साकेत में उर्मिला का विरह: सोनपाल सिंह

साक्षात्कार/ Interview
·       हिंदी साहित्य और साक्षात्कार विधा: चरंजीलाल
·       कवि वरवर राव से विशद कुमार की बातचीत
·       कथाकार भगवानदास मोरवाल से डॉ. एम. फीरोज अहमद की  बातचीत

अनुवाद/ Translation
·       भूमंडलीकरण के दौर में बाज़ारवाद और अनुवाद: कुलदीप कुमार पाण्डेय

प्रवासी साहित्य/ Diaspora Literature
·         प्रतिबंधित हिन्दी-साहित्य में प्रवासी भारतीय: डॉ. मधुलिका बेन पटेल
·         प्रवासी हिंदी साहित्य और साहित्यकार: मणिबेन पटेल




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