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प्रदीप नील जी का हरियाणवी उपन्यास "जाट कहवै, सुण जाटणी"


अपना पहला हरियाणवी उपन्यास "जाट कहवै, सुण जाटणी" आपके सामने रख रहा हूं, खरीदने का आग्रह बिल्कुल नहीं करूंगा। हां, गारंटी जरूर दे रहा हूं कि प्रकाशक से खरीदा गया यह उपन्यास आपको पूरा पढ़ कर भी पसन्द न आए तो बताएं और खरीद का सुबूत भेज दें। मैं न केवल आपके पैसे वापिस करूंगा बल्कि आपका समय खराब करने के लिए क्षमा भी मांगूंगा .
इस कलयुग में इससे ज्यादा और क्या कहूं ?
उपन्यास खरीदना चाहें तो प्रकाशक को मोबाइल नंबर 9829018087 पर अपना पता लिख कर मेसज कर दें। किताब वी पी पी से आ जाएगी। दूसरी ऑप्शन यह कि नीचे दिए गए Amazon.in लिंक पर क्लिक करके ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं : http://www.amazon.in/dp/9386470497
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